अहमदाबाद | बेहतर यात्रा अनुभव के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन में पश्चिम रेलवे हमेशा अग्रणी रहा है। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 की वजह से लगे लॉकडाउन के कठिन समय के बावजूद, पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री आलोक कंसल के गतिशील नेतृत्व में इसी दिशा में कई नई पहलों और तकनीकिओं की शुरुआत की गयी। महाप्रबंधक श्री कंसल ने सभी संबंधित प्रमुख विभागों के प्रमुखों और उनकी टीमों द्वारा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हांसिल की गई शानदार उपलब्धियों की सराहना की। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2020-21 एक कठिन वर्ष रहा। महामारी के दौर में कई बाधाओं के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने कई मील के पत्थर हासिल किए और कई लैंडमार्क घटनाएं हुईं। पश्चिम रेलवे ने वाई-फाई, लिफ्ट और एस्केलेटर, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों की स्थापना, रेलवे परिसरों में ऊर्जा कुशल एलईडी लाइट्स का प्रावधान, रेग्यूलर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का हेड ऑन जनरेशन (HOG) तकनीक में रूपांतरण इत्यादि यात्री सुविधाओं के प्रावधान तथा सुरक्षित ट्रेन के परिचालन में अत्याधुनिक तकनीक प्रदान करने के लिए सराहनीय प्रयास किये है।
स्टेशनों पर उन्नत यात्री सुविधाएं
स्टेशनों पर यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से, पश्चिम रेलवे ने विभिन्न यात्री सुविधाएं प्रदान की हैं। मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर 6 तथा चर्चगट स्टेशन पर 5 हाई वॉल्यूम लो स्पीड (एचवीएलएस) पंखे लगाए गए है। अभी तक, पश्चिम रेलवे के विभिन्न महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ऐसे 39 हाई वॉल्यूम लो स्पीड (एचवीएलएस) पंखे लगाए गए हैं। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग लोगों की सुविधा के लिए, वर्ष 2020 -21 में पश्चिम रेलवे पर 15 लिफ्ट और 26 एस्केलेटर लगाए गए, इस प्रकार पश्चिम रेलवे पर लिफ्टों और एस्कलेटरों की कुल संख्या क्रमशः 106 और 105 है। वर्ष 2020-21 में पश्चिम रेलवे के 25 स्टेशनों पर तेज और फ्री वाई-फाई इनस्टॉल किया गया है। पश्चिम रेलवे ने पारंपरिक कम सक्षम प्रकाश फिटिंग्स को बदलने के लिए पहल की और सभी 726 विद्युतीकृत स्टेशनों पर ऊर्जा कुशल एलईडी लाइटे लगायी गयी है। इससे रोशनी के स्तर में सुधार हुआ और साथ ही लगभग रु 12 करोड़ प्रति वर्ष की आवर्ती बचत भी हुई। इसके अलावा, वर्ष 2020 - 21 के दौरान 75 स्टेशनों को एयरपोर्ट की तरह की प्रकाश व्यवस्था प्रदान किया की गयी, इस प्रकार पश्चिम रेलवे पर इस तरह की सुविधा 186 स्टेशनों पर है।
नवीनीकरणीय ऊर्जा ( सोलर प्लांट )
 रेलवे द्वारा कार्बन फुटप्रिंटों को कम करने के उद्देश्य से, इस दिशा में विभिन्न उपायों को अपनाया गया है। पश्चिम रेलवे पर 9.44 MWp क्षमता के सोलर प्लांट लगाए गए हैं। इन संयंत्रों को स्थापित कर ग्रिड से जोड़ा गया है,जिसके परिणामस्वरूप इन इकाइयों से हरित ऊर्जा उत्पन्न होने के कारण गैर कर्षण ऊर्जा बिल में प्रति माह लगभग 25 लाख रुपये की आवर्ती बचत होती है। चालू वित्त वर्ष के दौरान संचयी बचत रु 2.84 करोड़ रही, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 26.26% अधिक है।
हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली पर परिचालित ट्रेनें
पश्चिम रेलवे वर्तमान में हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली पर 67 जोड़ी नियमित ट्रेनें परिचालित कर रही है, जो भारतीय रेलवे पर सर्वाधिक है। हेड ऑन जनरेशन प्रणाली अपनाने के परिणामस्वरूप,पश्चिम रेलवे ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 66.08 करोड़ रुपये की शुद्ध बचत हासिल की है।
अवार्ड्स में परिलक्षित कठिन परिश्रम
पश्चिम रेलवे स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न ऊर्जा संरक्षण उपायों का अनुसरण कर रही है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, पश्चिम रेलवे ने विद्युत मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी द्वारा स्थापित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार - 2020 में परिवहन श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त, संस्थान श्रेणी में 2 पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, भावनगर को प्रथम पुरस्कार और मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय , राजकोट को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इन पुरस्कारों को जनवरी, 2021 में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में माननीय विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के.सिंह द्वारा प्रदान किया गया । पश्चिम रेलवे के लिए यह गर्व का विषय है कि पश्चिम रेलवे के वड़ोदरा के इलेक्ट्रिक लोको शेड को पुश-पुल ऑपरेशन की परियोजना के लिए 13वां क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया - डी. एल. शाह क्वालिटी अवार्ड में सिल्वर अवार्ड मिला । यह पुरस्कार 17 दिसंबर 2020 को गुणवत्ता कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र के दौरान ऑनलाइन समारोह के माध्यम से प्राप्त हुआ। 2007 में शुरू किए गए डी. एल. शाह क्वालिटी अवार्ड्स को भारत में प्रतिष्ठानों की उन उत्कृष्ट परियोजनाओं के लिए दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रक्रिया, उत्पादों / सेवाओं, बेहतर / प्रभावी संचालन में निरंतर सुधार हुआ है। ये प्रशंसा और पुरस्कार पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (PCEE) श्री संजीव भूटानी के कुशल नेतृत्व में विद्युत विभाग द्वारा किए गए अथक और समर्पित प्रयास के फलस्वरूप प्राप्त हुए हैं ।
संरक्षा सर्वोपरि
संरक्षा पश्चिम रेलवे की हमेशा से प्राथमिकता रही है। कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान भी प्रमुख मुख्य सिग्नलिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर (PCSTE) श्री हरीश गुप्ता के नेतृत्व में पश्चिम रेलवे के सिग्नलिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन (एसएंडटी) ने अभूतपूर्व काम किया है। मुंबई के उपनगरीय खंड पर चर्चगेट से विरार तक उपनगरीय ट्रेनों में एक नई और उन्नत तकनीक मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार (एमटीआरसी) प्रणाली शुरू की गई। इस प्रणाली में ई एम यू ट्रेन के चालक दल के और कंट्रोल सेंटर के बीच संचार के साथ साथ कंट्रोल सेंटर द्वारा यात्रियों तथा सभी ईएमयू कैब के बीच भी ब्रॉडकास्ट कॉल संभव होगी। वर्ष 2020 - 21 के दौरान एक और उल्लेखनीय उपलब्धि 26 लेवल क्रॉसिंग गेटों की इंटरलॉकिंग और 60 स्थानों पर स्लाइडिंग बूम लगाने का प्रावधान है। साथ ही, 35 स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाई गई है।
डीजल शेड में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की मेंटेनेन्स की सुविधा
भविष्य की आवश्यकता के अनुसार गति और रूपांतरण के साथ, डीजल लोको शेड, वटवा और रतलाम के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा गया, जब इन डीजल शेडों ने इलेक्ट्रिक इंजनों का रखरखाव शुरू कर दिया। रतलाम शेड ने अगस्त,20 में ओवरहालिंग के बाद अपना पहला इलेक्ट्रिक लोको नं 23292 WAG5H बनाया। डीजल शेड,वटवा ने इलेक्ट्रिक लोको के ओवरहालिंग के लिए विशेषज्ञता भी विकसित की है। डीजल शेड,वटवा द्वारा इलेक्ट्रिक लोको नं 23739 WAG5(P) का आई ओ एच शेड्यूल किया गया और इसे 27 अगस्त 2020 को निकला गया।
पश्चिम रेलवे अपने सम्मानीय ग्राहकों के लिए एक सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले दिनों में हमेशा सुविधाओं को बढ़ाने और बेहतर करने के लिए प्रयासरत रहेगा।