नई दिल्ली । नेत्रा कुमानन ने 12 साल की उम्र तक टेनिस, साइक्लिंग, बास्केटबॉल के साथ भरतनाट्यम में भी हाथ आजमा लिया था लेकिन नौकायन से जुड़ने के बाद उन्हें जिंदगी का असली मकसद मिला हुआ, जिसे उन्होंने ओलंपिक टिकट हासिल करने वाली पहली भारतीय नौकाचालक बन कर सार्थक किया है। चेन्नई की 23 साल की इस खिलाड़ी ने ओमान से खास बातचीत की। उन्होंने ओमान में ही एशियाई क्वालिफायर की ‘लेजर रेडियल’ स्पर्धा में शीर्ष स्थान पर रहकर ओलंपिक टिकट हासिल किया है। नेत्रा ने 2014 और 2018 एशियाई खेलों में भाग लेने के बाद पिछले साल विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने कहा कि मैंने टेनिस, बास्केटबॉल, साइक्लिंग, कला (आर्ट) में हाथ आजमाया था। मैंने भरतनाट्यम में भी प्रशिक्षण लिया लेकिन नौकायन के लिए मुझे यह सब छोड़ना पड़ा। मेरी मां मुझे हर साल समर कैंप में रखती थी।’ नेत्रा ने कहा कि वह डेढ़ साल से घर से दूर हैं और ओलंपिक टिकट के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी जिसका फायदा हुआ।
नेत्रा हंगरी कोच टमस एस्जेस की देख रेख में अभ्यास कर रही है। हंगरी के टमस खुद भी दो बार ओलंपिक में भाग ले चुके हैं। नेत्रा ने बताया कि वह कोच केमार्गदर्शन में रेस से जुड़े तनाव से निपटने के तरीके सीख रही हैं। उन्होंने कहा कि हम दोनों एक-दूसरे के साथ एक साल से अधिक समय से काम कर रहे है। हमने रेसिंग के तनाव से निपटने के बारे में सीखने के साथ पूर्णकालिक एथलीट बनने के लिए जरूरी सब कुछ पर काम किया है।