नई दिल्ली। जोनल और डिविजनल कंट्रोल स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और दक्षिणी रेलवे, दक्षिणी पश्चिमी रेलवे, कोंकण रेलवे, केंद्रीय रेलवे और पश्चिमी रेलवे के सभी रेलवे स्टेशनों के साथ लगातार संपर्क में हैं। किसी भी आकस्मिकता की निगरानी और योजना बनाने के लिए डिविजन और जोन राज्य सरकारों के साथ निरंतर संपर्क में हैं।       
दुर्घटना राहत ट्रेनों (एआरटी), चिकित्सा राहत वाहनों (एमआरवी) और टावर वैगन जैसी रेलवे की सभी आपातकालीन प्रतिक्रिया को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पत्थर की धूल और बोल्डर (पत्थर के हिस्से) आदि के भण्डारों को किसी भी प्रकार की दरारों से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।   
संवेदनशील भागों की उस तरह विशेष सघन गश्ती की जा रही है, जिस तरह मानसून के मौसम में की जाती है।
संवेदनशील भागों में हवा की गति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और निर्देशों के अनुसार ट्रेनों की आवाजाही पर गति प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
मौसम की बदलती स्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ लंबी दूरी और कम दूरी की यात्री ट्रेनों का अस्थायी रद्दीकरण या पूर्व समाप्ति।      
14 मई, 2021 को दोपहर बाद 4 बजे एक आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ खोला गया है।  
गोवा बंदरगाह, वीएसजी और अन्य स्टेशनों की सेवा करने वाली रेलवे लाइनों को उचित घोषणाओं के साथ संचालित किया जा रहा है। अगर चक्रवात की तीव्रता अधिक होती है तो अधिकांश ट्रेनें रोक दी जाएंगी, हालांकि अभी काफी कम ट्रेनें चल रही हैं।
बंदरगाहों पर रेलवे रेकों के लिए लोडिंग और अनलोडिंग को चक्रवात की तीव्रता के अनुरूप ठीक और समायोजित किया जा रहा है और सभी संबंधितों को परिचालन समायोजित करने के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मानव जीवन और संपत्ति का नुकसान न हो।   
सभी संवेदनशील भागों और महत्वपूर्ण पुलों की लगातार इंजीनियरिंग शाखा द्वारा निगरानी की जा रही है और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए राहत सामग्री को सुविधाजनक स्थानों पर रखा गया है।
रेलवे राज्य के मौसम विभागों के साथ नियमित संपर्क में है और उसके अनुसार कार्रवाई कर रहा है।
सुरक्षा विभाग ने जीवन के नुकसान और संपत्ति की क्षति को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों को भी दोहराया है। सुरक्षा कारणों से जहां भी अस्थायी निलंबन होता है, वहां किसी भी रेलवे परिचालनों में न्यूनतम समय का व्यवधान और जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के प्रयास जारी हैं।