जयपुर. राजस्थान में कोरोना (COVID-19) के कहर के बीच पहले वैक्सीन (Vaccine) की आपूर्ति पर मचे बवाल के बाद अब ऑक्सीजन (Oxygen) को लेकर सियासत गरमायी हुई है. राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार पर ऑक्सीजन को लेकर भेदभाव के करने आरोप लगाए हैं. गहलोत मंत्रिपरिषद् (Gehlot Council of Ministers) की रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित हुई बैठक में करीब साढ़े तीन घंटे तक कोरोना संक्रमण से उपजे हालातों पर चर्चा हुई. इस बैठक में ऑक्सीजन की आपूर्ति और सप्लाई को लेकर भी विस्तार से मंथन किया गया.

बैठक में मंत्रियों ने ऑक्सीजन वितरण में भेदभाव का आरोप लगाते हुए नाराजगी जाहिर की. परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि केन्द्र सरकार ने ऑक्सजीन को लेकर नेशनल पॉलिसी बना दी है और वितरण की व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है. अब राजस्थान में उत्पादित हो रही ऑक्सीजन का भी केन्द्र सरकार ही फैसला कर रही है कि किस राज्य को कितनी ऑक्सीजन दी जाए.

गहलोत बोले हमें नाम मात्र की ऑक्सीजन ही मिली

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार बीजेपी और कांग्रेस शासित राज्यों में भेदभाव कर रही है. राजस्थान में ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन बन रही है लेकिन गुजरात को ज्यादा ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है. जबकि दोनों राज्यों में लगभग बराबर मरीज आ रहे हैं. खाचरियावास ने कहा कि गुजरात को 900 मीट्रिक टन और राजस्थान को 124 मीट्रिक टन ही ऑक्सीजन मिली. वहीं ओपन रिव्यू बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने भी इसे लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राजस्थान के भिवाड़ी में बनने वाली ऑक्सीजन का ठेका भी खुद ले लिया. हमें नाम मात्र की ऑक्सीजन ही मिली.

राजस्थान में आक्सीजन की स्थिति

राजस्थान में 15 अप्रैल को राजस्थान में 95 मिट्रिक टन ऑक्सीजन थी. उसके बाद 3 दिन में 125 मिट्रिक टन की खपत हुई. राजस्थान को 30 अप्रैल 250 मिट्रिक टन आक्सीजन की जरूरत है. केन्द्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने भी मुख्य सचिव को इस संबंध में पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि ऑक्सीजन की सप्लाई किसी भी हाल में नहीं रुकनी चाहिए. मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त और निर्बाध आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. ऑक्सीजन के इंटर सिटी और इंटरस्टेट के बेरोकटोक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिये.

ये भी हुए बैठक में निर्णय

कैबिनेट और मंत्रिपरिषद् की बैठक में खास तौर से कोरोना को लेकर ही चर्चा हुई लेकिन कुछ और भी महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. मंत्रिपरिषद् की बैठक में ईसरदा-दौसा वृहद पेयजल परियोजना का वित्त पोषण राज्य निधि से करने को मंजूरी दी गई. वहीं घर-घर औषधि योजना के प्रदेश स्तर पर क्रियान्वयन का भी निर्णय लिया गया. इसके तहत औषधीय पौधों की पौधशालाएं विकसित होंगी.