बाड़मेर ज़िले में कोरोना संक्रमण को दूसरी लहर ने हेल्थ सिस्टम को हिला कर रख दिया। कोरोना मरीज़ो की दिनों दिन बढ़ती तादाद से ज़िला अस्पताल बेड और ऑक्सीजन संकट से जूझ रहा है। हाल यह है कि इमरजेंसी के बाहर खड़े लोग दम तोड़ रहे हैं। इमरजेंसी में एक बेड पर दो-दो मरीजों का तो इलाज चल रहा है। वहीं, कई मरीज़ो का इलाज फर्श पर चल रहा है। साथ ही परिजन करीब 90 किलो का ऑक्सीजन सिलेंडर को इधर-उधर ले जाते दिख रहे है।

जिला अस्पताल में इतनी बड़ी डॉक्टरों की फौज के बावजूद भी व्यवस्थाएं का दम घुटने लगा है। जिला अस्पताल में बेड फुल होने के बाद पास ही के बालिका छात्रावास में बेड लगाए गए हैं। जहां पर ऑक्सीजन के मरीजो को भर्ती किया गया है। आलम यह है कि मरीजों के परिजनों को ज़िला अस्पताल से करीब 300-400 मीटर बालिका छात्रावास में ऑक्सीजन सिलेंडर खुद को उठाकर ले जाना पड़ रहा है।

परिजन देवीसिंह ने बताया कि मेरा भाई अस्पताल में भर्ती है। चार-चार घंटे में सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। अस्पताल से उठाकर बालिका छात्रावास लेकर जाते है। वहीं, इशाक खान ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी तो बालिका छात्रावास में कहा की ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल से लाने होंगे। तब हमें भर्ती मरीज के लिए खुद ही सिलेंडर उठाकर ले गए।

परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर उठाकर ले जा रहे है

गौरतलब है कि जिला अस्पताल फुल होने के बाद कन्या छात्रावास में 60 बेड का अस्पताल बनाया गया था मरीजों को अब बालिका छात्रावास में भर्ती किया जा रहा है। गंभीर रोगियों को ऑक्सीजन पर रखना पड़ रहा है, लेकिन अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर छात्रावास तक ले जाने के लिए पर्याप्त सपोर्ट स्टाफ नहीं है। भर्ती रोगियों के साथ आए परिजन ही खुद मशक्कत कर ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाते हुए नजर आए जबकि 90 किलो के ऑक्सीजन सिलेंडर को इधर-उधर करने के लिए 2 से 3 लोगों की जरूरत पड़ती है।