शहर में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। मरीजों को अस्पताल में बेड तक नसीब नहीं हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से जिले में संक्रमित के आंकड़ों में कमी आई है। उसके बावजूद अस्पतालों में बेड खाली नहीं है। इसके चलते नए मरीजों को बेड के लिए भी जंग लड़नी पड़ रही है। बुधवार को शहर के एमबीएस अस्पताल में भी ऐसा ही देखने के लिए मिला। जहां एक पति-पत्नी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर के सामने ही लेट गए। करीब 6 घंटे ऐसे ही पड़े रहने के बाद उन्हें बेड दिया गया।

रामनगर देवलीमांझी निवासी ग्यानु बाई (37) पिछले 11 साल से आंगन बाड़ी में आशा सहयोगिनी है। कोरोना काल में घर घर जाकर सर्वे के काम मे जुटी रहीं। उन्होंने पति सत्यप्रकाश बैरवा (40) और खुद ने कोरोना का सैम्पल दिया था। दोनों मंगलवार को पॉजिटिव मिले। ग्यानु बाई ने बताया कि दोपहर 3 बजे इलाज के लिए एमबीएस पहुंचे थे। पति का सेचुरेशन 88 रह गया। सांस लेने में दिक्कत होने लगी। डॉक्टर से भर्ती करने की गुहार लगाई। डॉक्टर ने बेड खाली नहीं होने का हवाला दिया। ग्यानु ने पति को एमबीएस के रजिस्ट्रेशन काउंटर के सामने ही लेटा दिया। 3 घंटे इंतजार के बाद भी बेड नही मिला। तब तक लगभग 7 बज चुके थे।

हंगामा किया तब बेड मिला

कुछ लोगों ने मदद का प्रयास किया। अस्पताल प्रशासन से बात की। जवाब एक ही बेड खाली नही है। आखिरकार दोनों को नए अस्पताल के रेफर किया गया। ग्यानु ने बताया कि 1 घंटे तक एंबुलेंस भी नसीब नहीं हुई। थक हारकर देवर को बुलाया। फिर देवर की बाइक पर बैठकर तीनों नए अस्पताल पहुंचे। वहां, ओपीडी में डॉक्टर ने चेक किया। डॉक्टर दवाई लिख दी लेकिन भर्ती का पर्चा नही बनाया। उसने भी कहा- बेड खाली नहीं है घर ले जाओ।

वहां भी 3 घंटे ओपीडी में ऐसे ही पड़े रहे। पति की तबियत बिगड़ने लगी। फिर हंगामा किया। रात 11 बजे डॉक्टर,पुलिस सहित स्टाफ के लोग इकठ्ठा हुए। हंगामे के बाद बेड नसीब हुआ। जिस जगह भर्ती किया गया है। वहां अभी भी 10-11 बेड खाली है।