लखनऊ । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को उत्तर प्रदेश का तीसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जनता को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर पहली फ्लाइट श्रीलंका से आएगी, जिसमें वहां के राष्ट्रपति राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के साथ सौ से अधिक बौद्ध भिक्षु और श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल के गणमान्य व्यक्ति रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित सांसद तथा विधायकों अन्य की उपस्थिति में कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। बुधवार को कोलंबो से 125 गणमान्य व्यक्तियों बौद्ध भिक्षुओं को लेकर पहली उड़ान यहां पर उतरेगी। इस हवाई अड्डे से दुनिया भर के बौद्धों को भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल की यात्रा करने की सुविधा मिल सकेगी।

प्रदेश का सबसे लम्बा रन-वे वाला एयरपोर्ट

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश का सबसे लम्बा रन-वे वाला एयरपोर्ट है। इसका रन-वे सबसे लम्बा (3.2 किमी लम्बा 45 मीटर चौड़ा) है। इसके रन-वे की क्षमता 8 फ्लाइट (चार आगमन चार प्रस्थान) प्रति घंटा है। इस एयरपोर्ट पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि यहां दिन ही नहीं रात में भी उड़ान संभव रहे। इसकी अंतरिम पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग 3600 वर्गमीटर में बनी हुई है और इसकी पीक ऑवर पैसेंजर क्षमता 300 की है। इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए पांच मार्च 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एमओयू हस्ताक्षरित हुआ था। प्रदेश सरकार ने दस अक्टूबर 2019 को इस एयरपोर्ट को एयरपोर्ट अथॉरिटी को हैंडओवर किया।

3600 वर्ग मीटर क्षेत्र में एयरपोर्ट टर्मिनल

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने लम्बे समय से कुशीनगर के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से 260 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 3600 वर्गमीटर में फैले नए टर्मिनल भवन के साथ कुशीनगर हवाई अड्डा तैयार किया है। नया टर्मिनल भीड़भाड़ वाले समय में 300 यात्रियों के लिएआने-जाने की सुविधा प्रदान करेगा। इस एयरपोर्ट की सुविधा का लाभ करीब दो अधिक की आबादी हवाई ले सकेगी। इस एयरपोर्ट के परिक्षेत्र में 10-15 जिले हैं। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी-उत्तरी भाग की बड़ी प्रवासी आबादी के लिए सहायक सिद्ध होगा। इससे बागवानी उत्पादों जैसे केला, स्ट्रॉबेरी और मशरूम के निर्यात के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुशीनगर बौद्ध सर्किट का केंद्र बिंदु

कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल है। यहां भगवान गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। यह बौद्ध सर्किट का केंद्र बिंदु भी है। जिसमें लुंबिनी, सारनाथ और गया के तीर्थस्थल शामिल हैं। हवाई अड्डा बौद्ध धर्म के और अधिक अनुयायियों को देश और विदेश से कुशीनगर आकर्षित करने में मदद करेगा और बौद्ध विषय वस्तु आधारित सर्किट के विकास को बढ़ाएगा। बौद्ध सर्किट के लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, राजगीर, संकिसा और वैशाली की यात्रा अब कम समय में पूरी हो सकेगी। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस सप्ताह चालू हो जाएगा। पहले तो घरेलू उड़ान शुरू होगी, इसके बाद से यहां से अंतरराष्टीय उड़ान का संचालन होगी। इसके शुरू होने से जटिल यात्रा अब बेहद सुगम होगी। भारत में विदेश से आने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायियों की हवाई यात्रा आवश्यकता सरल होगी

कुशीनगर तीसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश में लखनऊ तथा वाराणसी के बाद कुशीनगर तीसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। नवंबर के पहले सप्ताह से यहां से श्रीलंका, नेपाल, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया तथा दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए उड़ान शुरू होगी। इसके साथ ही भारत की घरेलू उड़ान का भी संचालन होगा। कुशनीगर का अब दक्षिण एशियाई देशों के साथ सीधा हवाई संपर्क होगा। अब यह एयरपोर्ट एक भारत श्रेष्ठ भारत को प्रोत्साहित करने के साथ दुनिया भर के बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगो के लिए भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल के दर्शन करने की सुविधा प्रदान करेगा। पीएम नरेन्द्र मोदी के बुधवार को कुशीनगर आगमन पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय कुशीनगर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है जिसमें बौद्ध सर्किट को संभालने वाले प्रमुख टूर ऑपरेटर भाग लेंगे। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो जाने के बाद पर्यटकों के आगमन में 20 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।

कुशीनगर हवाई अड्डे के उद्घाटन से दुनिया के विभिन्न हिस्सों के तीर्थयात्रियों को इस क्षेत्र के विभिन्न बौद्ध स्थलों से निर्बाध संपर्क प्रदान करने की सुविधा मिलेगी। इससे दक्षिण एशियाई देशों के साथ सीधा विमान सम्पर्क होगा। श्रीलंका, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर आदि से आने वाले पर्यटकों के लिए कुशीनगर पहुंचने और क्षेत्र की समृद्ध विरासत का अनुभव करना आसान बना देगी।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल तीर्थ स्थल को अंतरराष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर रखेगा बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा। यह होटल व्यवसाय, पर्यटन एजेंसियों, रेस्तरां आदि को बढ़ावा देकर आतिथ्य उद्योग पर कई गुना प्रभाव डालेगा। यह फीडर परिवहन सेवाओं, स्थानीय गाइड की नौकरियों आदि में अपार अवसर खोलकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार पैदा करेगा। स्थानीय उद्योग और उत्पाद को वैश्विक मान्यता मिलेगी। यह सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देगा और स्थानीय संस्कृति और परम्पराओं को संरक्षित करने में भी मदद करेगा।

कुशीनगर में हवाई अड्डे के विकास से कुशीनगर को बौद्ध तीर्थयात्रा के चार प्रमुख स्थानों में से एक के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। यह कुशीनगर को बौद्ध सर्किट के हिस्से के रूप में प्रमुखता प्रदान करने में मदद करेगा। इसके अलावा, इससे भारत को मूल बौद्धिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा और दुनिया भर में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रसार होगा।