नई दिल्ली । कांग्रेस ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर कटाक्ष करते हुए उनसे पूछा कि क्या उन्होंने तीन कृषि कानूनों को लाने में भाजपा के साथ मिलीभगत की है, जिनके खिलाफ किसान पिछले साल से विरोध कर रहे हैं। यह टिप्पणी अमरिंदर सिंह के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने था कहा कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे और अगर किसानों का मुद्दा हल हो जाता है तो वह भाजपा के साथ जुड़ सकते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा, "जिस तरह से इस तरह के बयान सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे हैं, सवाल यह है कि क्या अमरिंदर सिंह और भाजपा की मिलीभगत से तीन काले कृषि कानून लाए गए थे।"
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि भाजपा और अमरिंदर सिंह तीन कृषि कानून लाने में एक साथ थे।"
वल्लभ ने कहा कि पंजाब के 99 प्रतिशत विधायक इन मुद्दों को समझते हैं और सिंह द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा कि उन्हें भाजपा के साथ गठजोड़ करने में कोई समस्या नहीं है, यह साबित करती  है कि कांग्रेस पार्टी की उनके खिलाफ की गयी कार्रवाई सही थी, अब वह उस पार्टी के साथ जाने को तैयार हैं जो एमएसपी को कानूनी गारंटी नहीं दे रही है।
पंजाब के प्रभारी एआईसीसी महासचिव हरीश रावत ने कहा कि अमरिंदर सिंह ने साबित कर दिया है कि विधायक कुछ समय से कह रहे थे कि वह भाजपा और अकालियों के साथ हैं।
उन्होंने कहा, "वह कांग्रेस के वोट काटेंगे और बदले में भाजपा की मदद करेंगे, लेकिन पंजाब के लोग अब सब कुछ समझते हैं।"
रावत ने पार्टी आलाकमान से उन्हें पंजाब के प्रभारी के कर्तव्यों से मुक्त करने का भी आग्रह किया  क्योंकि वह अपना सारा समय अपनी 'कर्मभूमि' उत्तराखंड में बिताना चाहते हैं, जो बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।
एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा कि कुछ महीनों के बाद पंजाब और उत्तराखंड में चुनाव होने हैं और वे दोनों जगहों पर पूरा समय नहीं बिता सकते।