वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) और ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण (Gyanvapi Mosque Case) में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने विश्वनाथ मंदिर पक्ष की ओर से खुद को वादमित्र बनाने की प्रार्थना की थी. कई तारीखों तक चली बहस को सुनने और आपत्तियों का अवलोकन करने के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया.

बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मामले में पक्षकार बनने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था. जिस पर पहले से मौजूद वाद मित्र ने मौखिक आपत्ति जताई, जिस पर कोर्ट ने सभी दूसरे पक्षों से अपनी-अपनी लिखित आपत्ति दाखिल करने का आदेश दिया. इसके बाद कई तारीखों पर इस याचिका को कोर्ट ने सुना और 8 मार्च यानी सोमवार को याचिका खारिज कर दी.

बता दें कि काशी में विश्वेश्वर महादेव बनाम ज्ञानव्यापी मस्जिद केस की सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है. मंदिर पक्ष की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग पर एक बार फिर गुरुवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन मामले में नया मोड़ तब आ गया था. जब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पहुंचा था. इसके जरिए उन्होंने काशी विश्वनाथ देवता की तरफ से उनको पक्षकार बनाने की मांग की. उनके इस प्रार्थना पत्र पर पहले से ही इस केस में न्यायालय की ओर से नियुक्त वादमित्र विजयशंकर रस्तोगी और सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ के अधिवक्ता तौहीद खान ने आपत्ति की थी.

विश्वनाथ देवता की तरफ से पहले से नियुक्त वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया था कि ये जनप्रतिनिधित्व वाद है. किसी भी व्यक्ति को सीधे न्यायालय में आकर पक्षकार बनने का कोई अधिकार नहीं है. इस पर आपत्ति की गई कि एक वाद मित्र होते हुए दूसरे वाद मित्र को नियुक्त नहीं किया जा सकता. वहीं, मस्जिद पक्ष की ओर से सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से नियुक्त अधिवक्ता तौहीद खान ने बताया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना वजह पार्टी बन रहे हैं. पहले से ही इसके लिए वाद मित्र हैं.