जयपुर । राजस्थान में मदरसों के विकास के लिए प्रदेश सरकार 15 से 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मुहैया करवाएगी यह सहायता राशि मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत दी जाएगी इस संबंध में राजस्थान सरकार के अल्पसंख्यक मामलात विभाग में शामिल राजस्थान मदरसा बोर्ड के सचिव ने एक विज्ञप्ति जारी की है इसके अनुसार राजस्थान मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड ए श्रेणी के मदरसों के विकास के लिए मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत आवेदन मांगे गए हैं. इसकी प्रारंभ तिथि 1 अक्टूबर 2021 है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2021 है. योजना में प्राथमिक स्तर के मदरसों को अधिकतम 15 लाख रुपये और उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों को अधिकतम 25 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाने का प्रावधान है।
2003 में बना मदरसा बोर्ड को मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग से अलग बनाया गया है मदरसा के लिए एक्ट और नियम बनाया जाए उसके लिए विधानसभा में एक्ट बनाया गया और नियम के लिए वित्त विभाग को भेजा गया पहली बार बजट में में मदरसों को आधुनिकीकरण के लिए सरकार को कम्प्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, स्मार्ट क्लास रूम, फर्नीचर देंगे और आधार रूप संरचना भवन भी शामिल किया गया. उसके लिए मदरसों को चुना है, जो कि राजस्थान में हर जिले में 5-7 मॉडल मदरसा होंगे. मॉडल मदरसा के भवन नहीं तो भवन का बजट दे रहे है. 90 प्रतिशत का बजट सरकार देगी और 10 प्रतिशत संस्था देगी. 5 वीं तक के मदरसा को 15 लाख और 8 वीं तक 25 लाख रुपये का बजट दे रहे है। राजस्थान में, जहां भी मॉडल मदरसा बनाने का प्रस्ताव आता है तो उसको प्राथमिकता देंगे, जिससे ऐसे मदरसों का चयन हो सके और क्वालिटी वाली शिक्षा मदरसों को मिल सकें आने वाले समय में एक्ट बनने के बाद मदरसों में अपना एक पाठयक्रम होंगे.  तीन साल पहले पहले 6 से 7 हॉस्टल थे. गहलोत सरकार के आने बाद से पहली बार 50 हॉस्टल राजकीय हॉस्टल है. 50 ऐसे हॉस्टल है, जिनकों एंजीओ चला रहे है यानी पूरे राजस्थान में 100 बालिका-बालक छात्रावास चलाए जा रहे हैं. पहली बार राजस्थान में मदरसा भी नवोदय विद्यायल की तर्ज में आवासीय विद्यायल बनाने जा रहे हैं. 8 आवासीय विद्यायल राजस्थान में स्वीकृत कर दिए गए. एक आवासीय विद्यायल पर 19 से 20 करोड़ खर्च पर तैयार किए जा रहे है, जहां अल्पसंख्यक ब्लॉक है. वहां आवासीय विद्यायल बना रहे है।