लखनऊ, सीएम योगी आदित्यनाथ अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे। योगी ने परिजनों से भी की भीड़ ना बढ़ाने की अपील की है।योगी ने कहा कि अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुःख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं। जीवन में ईमानदारी कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया।

योगी ने कहा कि अन्तिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को यूपी की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अन्तिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता तथा महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीया मां, पूर्वाश्रम से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग अन्तिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। लॉकडाउन के बाद दर्शन करने आएंगा। 

दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट ने सोमवार को दिल्ली के एम्स में अपनी अंतिम सांस ली। उन्हें लिवर और किडनी की समस्या थी और बीते 13 अप्रैल से वह एम्स में भर्ती थे। यहां पर गेस्ट्रो विभाग के डॉक्टर विनीत आहूजा की टीम उनका इलाज कर रहे थे। वहीं, जैसे ही सीएम योगी को दुःखद समाचार मिला, उन्होंने टीम 11 की साथ चल रही मीटिंग को स्थगित कर दी और चुपचाप अपने कमरे में चले गए।

एम्स के एक डॉक्टर ने बताया कि आंनद सिंह बिष्ट को मुख्य रूप से पेट की तकलीफ के चलते भर्ती किया गया था। इसके अलावा डिहाइड्रेशन, लो-बीपी और पैरों में गैंगरीन की समस्या थी। अस्पताल में भर्ती करने के बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी जांच हुई थी। उसी रिपोर्ट के आधार उनका उपचार किया जा रहा था।

काफी समय से खराब थी तबीयत
योगी के पिता आनंद सिंह की तबीयत पहले से खराब चल रही थी। कुछ समय पहले भी उन्‍हें देहरादून के अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। उस वक्‍त उन्‍हें डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। उन्‍हें पहले से बीपीसी समेत एक गैंग्रीन जैसी गंभीर बीमारी थी।