राम नवमी का पर्व आने वाला है, हिंदू पंचांग के अनुसार 21 अप्रैल बुधवार को ये त्यौहार पड़ रहा है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस दिन मर्यादा पुरुषोत्त्म श्री राम का जन्म हुआ। यही कारण है कि इस दिन श्री राम की विधि वत पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस दिन से जुड़ी कई बातें बताई गई है। जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि श्री राम नवमी तिथि से जुड़ी खास बातें-

हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि चंद्र मास के दोनों पक्षों में आती है। शास्त्रों के इस तिथि को स्वामिनी देवी माता दुर्गा को माना जाता है। इस पावन तिथि को रिक्ता तिथियों में से एक माना जाता है। बता दें रिक्ता का अर्थ होता है खाली। माना जाता है इस तिथि में किए गए कार्योंसिद्धि रिक्त होती है। जिस कारण इस तिथि में समस्त प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। बता दें देवी दुर्गा के अलावा केवल श्रीराम की पूजा ही फलदायी होती है।

बताया जाता है कि चैत्र मास की नवमी तिथि शून्य संज्ञक होती है, तथा इसकी दिशा पूर्व मानी जाती है। शनिवार को सिद्धदा और गुरुवार को मृत्युदा मानी गई है। इसका मतलब शनिवार को किए गए कार्य में सफलता मिलती है और गुरुवार को किए गए कार्य में सफलता के आसार कम होते हैं।

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को हर साल श्रीराम जन्मोत्सव के रूप में उत्साह और हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का पूजन और वंदन करने से सुख, समृद्धि और शांति बढ़ती है। मान्यता है इस दिन पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार नवमी के दिन लौकी खाना निषेध है, क्योंकि इस दिन लौकी का सेवन गौ-मांस के समान माना गया है। इस दिन कड़ी, पूरणपौल, खीर, पूरी, साग, भजिये, हलवा, कद्दू या आलू की सब्जी बनाई जा सकती है। तथा देवी दुर्गा और श्रीराम को भोग लगाने के बाद ही भोजन किया जाता है।