अमेठी :जिले की पंचायतों का नजरिया इस बार कुछ बदलता नजर आ रहा है। कुछ साल पहले जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इलाके के सबसे बुजुर्ग को पंचायत की कमान सौंपना सबसे तसल्लीबख्श काम माना जाता था, लेकिन अब माहौल बदला सा दिख रहा है। यूपी सरकार के जरिए हो रहे महिला सशक्तिकरण अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में कराए गए विकास कार्यों के चलते अब ग्रामीण युवा और महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।जो ग्रामीण लोकतंत्र और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की यह एक शानदार पहल है। 
जिले के मुसाफिरखाना विकासखंड के दादरा गांव निवासी अनिल मौर्य,जग प्रसाद,शिवम,दयाराम,जुगलेश और राम मिलन को उम्मीद है कि बीते पंचायत चुनावों के मुकाबले इस बार बड़ी संख्या में पढ़े लिखे युवा और महिलाएं गांव की राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने उतरेंगे। इसके चलते गांवों में विकास संबंधी कार्यों में तेजी आयेगी और ग्रामीण लोकतंत्र भी मजबूत होगा। 
इन ग्रामीणों का कहना है कि अब पंचायत चुनाव जिस तर्ज पर होने लगे हैं, उसमें बड़ी उम्र के लोग धीरे-धीरे अनफिट होते जा रहे हैं। दूसरा, अब पंचायतों की भूमिका भी बदल गई है। पंचायतें पहले आपसी झगड़ा-झंझट निपटाने का केंद्र हुआ करती थी, लेकिन अब वह विकास की धुरी बन चुकी हैं।