पितृपक्ष शुरू हो गया है और सभी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करना शुरू कर दिए हैं। हम जानते हैं की पूर्वजों के लिए तर्पण, भोज और पिंडदान पूरे विधि विधान से नदी के किनारे किया जाता है। पिंडदान मुख्यता अपने पूर्वजों की मुक्ति हेतु किया जाता है इसलिए से पिंडदान कहते हैं। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान का काफी महत्व माना जाता है। पिण्डदान नदी के तट पर किया जाता है और दक्षिण की तरफ मुंह करके और जनेऊ को दाए कंधे पर रखकर चावल, गाय के दूध, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर तैयार किए गए पिंडों का श्राद्ध भाव के साथ अपने पितरों को अर्पित किया जाता है। पितरों का तर्पण करने से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। पूर्वजों को पानी देकर एवं ब्राह्मणों को भोजन कराने से हमारे पूर्वज प्रसन्न हो जाते हैं। हमारे पूर्वजों को भोजन की प्राप्ति होती है। जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। तर्पण करने से बड़ी-बड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं एवं भविष्य काल में जीवन में आने वाली बिडंबनाएं दूर होती हैं।अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने हेतु एवं उनके प्रति श्रद्धा बनाए रखने हेतु उनका का तर्पण किया जाता है। जब पितृपक्ष आते हैं तो पितरों के द्वार खुल जाते हैं एवं उनकी दृष्टि परिवार पर पड़ जाती है।


 

पितृपक्ष में क्या करें दान

•पितृ पक्ष में गुड़ और नमक का भी दान किया जाता है और यह काफी शुभ माना जाता है. यदि आपके घर में कलेश या झगड़ा होता है तो श्राद्धों में गुड़ और नमक का दान करना चाहिए. शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष में कपड़े दान करने का भी काफी महत्व है. इसलिए आप जूते, चप्पल और छाते का दान कर सकते हैं।

•सनातन धर्म के अनुसार प्रतिपक्ष के दौरान भोजन को सबसे बड़ा दान माना गया है। भूखें, निर्धन एवं जरूरत लोगों की मदद करना एवं अन्न भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। यदि भोजन ना कर सको तो भोजन की सामग्री भी दान कर सकते हैं।

क्या ना करें

•पितृपक्ष के दौरान हमेशा सादा भोजन करना चाहिए। •पूर्वजों को जब प्रसाद लगाएं तो भूलकर भी उसमें प्याज लहसुन का इस्तेमाल ना किया गया हो।

•अगर आपको अपने पूर्वज की तिथि याद नहीं है तो पितृपक्ष के अंतिम दिन करके तर्पण विधि पूजा अर्चना कर सकते हैं।

•पितृपक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण विधि करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों की पूजा न करने से पूर्वजों को मृत्युलोक में जगह नहीं मिलती और उनकी आत्मा भटकती रहती है, जिससे पितर नाराज होते हैं और कई दोष लगते हैं। इसलिए पितृपक्ष में तर्पण विधि और श्राद्ध कर्म किया जाता है।

•पितृपक्ष पर पूर्वजों को यदि भोजन ना दिया जाए एवं तर्पण ना किया जाए तो इससे पूर्वजों को मृत्यु लोक में स्थान नहीं मिलता और उनकी आत्मा पृथ्वी पर भटकती
रहती है इसलिए हमें तर्पण विधि या श्राद्ध करना चाहिए।

•पितृपक्ष के दौरान कोई भी नशा नहीं करना चाहिए।

•पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों की पूजा,अर्चना करनी चाहिए। आपको ध्यान रखना चाहिए, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य ना करें एवं कोई भी नई वस्तु घर में ना लाएं ऐसा करने से पूर्वज रूष्ट होते हैं और इसे अशुभ माना जाता है।

•यदि आपका स्वभाव क्रोधी है तो आपको क्रोध से बचना है क्योंकि यदि आप किसी पर क्रोध करते हैं तो इससे उसका अपमान होगा और पूर्वज नाराज हो सकते हैं। आपको अपना स्वभाव सामान्य रखना होगा सभी से सरल और सहजता से बर्ताव करना होगा।

•यदि आपको कोई निर्धन व्यक्ति अथवा भूमिका व्यक्ति दिखे तो उसे भोजन कराएं और उसकी मदद करें इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

•यदि आप शादीशुदा हैं तो आपको अपने साथी के साथ अच्छे से बर्ताव करना चाहिए एवं साथी के साथ पूजा करनी चाहिए और शारीरिक संबंध से बचना होगा। इन दिनों मन पर संयम रखना चाहिए। एक तरह से ब्रह्मचारी होने का कर्तव्य बखूबी निभाना होगा।