भिलाई। नैनीताल घूमने गए भिलाई-दुर्ग के सभी 55 लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं। आज यह खबर जैसे ही घर वालों को मिली, सभी ने राहत की सांस ली। नैनीताल के कैंचीधाम के पास भूस्खलन के बाद तीन दिन से भिलाई दुर्ग के 55 लोग फंस हुए थे।

इसकी जानकारी मिलने के बाद यहां पर उनके स्वजन परेशान होने लगे थे। जिनके द्वारा जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई जो अंततः राहत के रूप में सामने आई है। सभी 55 लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इस समय नैनीताल के एक होटल में ठहरे हुए हैं। जिन्हें गुरुवार को नैनीताल से दिल्ली और वहां से रायपुर होते हुए भिलाई दुर्ग लाया जाएगा।

दुर्ग सिंधिया नगर निवासी प्रसन्नाजीत दास ने बताया कि उनका पूरा परिवार सुरक्षित है, लेकिन जब तक वे दुर्ग उनके घर नहीं जाते। तब तक उन्हें चैन मिलेगा। नैनीताल पहुंचने के बाद भिलाई दुर्ग निवासी सुभना दास, रितिका दास, यामिनी सुरेंद्र ने बताया कि कैंचीधाम के समीप जहां पर भूस्खलन हुआ था वहां पर वे फंसने के बाद काफी परेशान होने लगे। उनके सामने और पीछे जाने के लिए कोई मार्ग नहीं था।

ऐसी स्थिति के बाद वह सब काफी परेशान होने लगे। कहीं से भी किसी का संपर्क ना होने की वजह से उन्हें जान जाने का खतरा लग रहा था। सोमवार शाम से फंसे इन लोगों को खाने पीने के लिए कुछ नहीं मिला। भूखे प्यासी 44 महिलाएं, छह बच्चों के समक्ष भारी संकट खड़ा हो गया था।

भिलाई निवासी यामिनी ने बताया कि कैची धाम से किसी तरह वे लोग नैनीताल बस स्टैंड स्थित होटल में पहुंच गए ,लेकिन उनके लिए खाने की कोई व्यवस्था नहीं थी पैसे भी नहीं होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दो दिनों से भूखे प्यासे होने के साथ जैसे ही नैनीताल पहुंचे सभी ने जमकर पानी पिया, तब जाकर सबकी प्यास बुझी और सभी ने थोड़ी राहत की सांस ली।

दुर्ग के सांसद विजय बघेल से आज भी कई लोग मिले उनके द्वारा नैनीताल में फंसे लोगों के संबंध में जानकारी मांगी गई। सांसद विजय बघेल ने नैनीताल के सांसद और गृह राज्य मंत्री अजय भट्ट से चर्चा कर वस्तु स्थिति की जानकारी ली और स्वजनों को बताया कि सभी सुरक्षित हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सभी की सहायता करने में जुटे हुए हैं।

इधर दुर्ग जिला प्रशासन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर ने नैनीताल जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर वस्तु स्थिति की जानकारी ली।

जिसके मुताबिक डोगरा बटालियन की मदद से रेस्क्यू कर फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।अपर कलेक्टर दुर्ग नूपुर राशि पन्नाा ने बताया कि प्रशासन लगातार नैनीताल जिला प्रशासन के संपर्क में है। सभी यात्रियों को जरूरी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। गुरुवार सुबह सभी यात्री छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो जाएंगे। यात्रियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति विशेष रूप से आभार जताया है।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल जिले में लगातार बारिश के कारण कई भूस्खलन और सड़कें अवरुद्ध हो गई थी। नैनीताल जिला प्रशासन से नैनीताल ने फंसे हुए नागरिकों को बचाने के लिए तुरंत सैन्य हस्तक्षेप का अनुरोध किया। गरमपानी खैरना क्षेत्र के पास स्थिति बहुत गंभीर है। बारिश भूस्खलन की वजह से घाटी प्रभावित है शिप्रा नदी के अत्यधिक प्रवाह से इमारतें संकट में हैं।

परिस्थिति के गंभीर होने पर प्रशासन द्वारा भारतीय सेना की रानीखेत स्थित 14 डोगरा बटालियन को राहत के लिए निवेदन किया गया। कलेक्टर नैनीताल धीराज सिंह गरबियाल द्वारा मदद के लिए डोगरा बटालियन को संदेश भेजा गया। संदेश मिलने के 30 मिनट के अंतर्गत जवान डोगरा बटालियन की रेस्क्यू टुकड़ी रानीखेत से खैरना की ओर रवाना हो गई। कम समय होने के बावजूद सेना अपने साथ बचाव से संबंधित सभी उपकरण और फंसे हुए लोगों के लिए फूड पैकेट साथ लेकर पहुंची