राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है जहां श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। इसके अलावा अन्य स्थलों में अगस्त्य आश्रम, गोदावरी नदी के किनारे स्थित एक शनि मंदिर जहां श्री राम ने पूजा की थी आदि शामिल हैं। ये सभी स्थान महाराष्ट्र में स्थित हैं।

शनैश्वर मंदिर, राक्षसभुवन, बीड़
शनैश्वर मंदिर के बारे में लोक मान्यता है कि यहां श्रीराम पर शनि की साढ़ेसाती लगी थी। उन्होंने शनि देव की यहां विशेष पूजा-अर्चना की थी। आज भी शनि को शांत करने के लिए दूर-दूर से लोग गोदावरी के किनारे शनि पूजा के लिए आते हैं।
(ग्रंथ उल्लेख : जनश्रुतियों के आधार पर)

जन स्थान, नासिक
नासिक में पंचवटी से 8 से 10 कि.मी. दूर गोदावरी तथा कपिला नदी के संगम पर श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। नासिका कर्तन स्थल होने के कारण ही शहर का नाम नासिक है परंतु त्रेता युग में यह क्षेत्र जन स्थान के नाम से प्रसिद्ध था। राक्षस राज रावण का यह प्रमुख केन्द्र था।
(ग्रंथ उल्लेख : वा. रा. 3/18 से 30, पूरे अध्याय तथा 3/49/1 से 22, मानस 3/16/2 से 3/20 दोहे तक)

अगस्त्य आश्रम, अंकई, नासिक
अंकई में पहाड़ी की चोटी पर एक विशाल गुफा में अगस्त्य जी तथा श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी का मंदिर है। पास ही 6 तालाब हैं जिनमें स्वच्छ जल सदा भरा रहता है। श्रीराम के वनवास काल में यहां आने की लोक कथा प्रचलित है।