वाराणसी । धर्मनगरी वाराणसी में मौसम में अप्रत्याशित बदलाव केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि नदी और सरोवरों पर भी दिखना शुरू हो गया है। आलम ये है कि मार्च के पहले हफ्ते में ही गंगा ने घाटों से दूर चला गया है, जो आमतौर पर मई-जून में होता है। घरों में पंखे और होटलों में एसी चलना शुरू हो गए हैं। घाट और गंगा के बीच साफ तौर पर एक बड़ा मैदान दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यहां अभी से गंगा सीढ़ियों से तकरीबन 60 फीट दूर बह रही हैं। बचपन से घाट किनारे पले बढ़े नौजवान साजन और फिरोज भी हैरान हैं। इस बारे में साजन ने बताया ‎कि वो बचपन से ही मां गंगा की गोद में तैरते आए हैं, लेकिन पहली बार ये देखने को मिल रहा है कि गंगा मइया घाट छोड़कर इतनी दूर चली गई हैं। 
वहीं, फिरोज का कहना है कि अभी से जब ये हालात हैं तो प्रचंड गर्मियों में क्या होगा। वहीं गंगा वैज्ञानिक प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी इसे मौसम के मिजाज का बदलना बताते हैं। उन्होंने कहा कि ये खुशी की बात है कि गंगा अब पहले से ज्यादा निर्मल और साफ हुई हैं। घुलनशील आक्सीजन का स्तर भी बढ़ गया है। यानी आचमन योग्य गंगा हो रही हैं लेकिन बावजूद इसके जलवायु परिवर्तन चिंताजनक हैं। जब बारिश चाहिए तो होती नहीं। जब पानी नहीं चाहिए तो बेमौसम बारिश हो जा रही है। फिलहाल अलग अलग घाटों में गंगा की ये स्थिति अलग-अलग हैं।