धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि भोलेनाथ का स्वभाव अति भोला बताया गया है। जिस कारण ये अपने भक्तों के जरा से प्रयासों से ही अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैैं। लेकिन लेकिन लेकिन...धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि अगर शिव जी का पूजा में किसी प्रकार की भूल हो जाए तो शिव जी क्रोधित भी हो जाते हैं। और इनके क्रोध से जुड़ी कई कथाएं धार्मिक शास्त्रों व ग्रंथों में वर्णित है। तो अगर आप इनके क्रोध का शिकार नहीं होना चाहते तो आगे दी गई जानकारी जरूर जान लें।

खासतौर पर श्रावण मास को लेकर कहा जाता है कि इस मास में शिव शंकर की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इनकी पूजा के दौरान सामग्री का चयन बिल्कुल सही होना चाहिए। क्योंकि श्रावण मास में शिवजी और माता पार्तती की पूजा का महत्व रहता है। इनकी पूजा सामग्री में कई प्रकार की सामग्रियां इस्तेमाल होती हैं। तो वहीं शिव जी को प्रसन्न करने के लिए विशेष प्रकार के फूल भी चढ़ाए जाते हैं। परंतु इस संदर्भ में यह जानना भी बेहद जरूरी होता है कि कौन सी चीज़ें इन पर अर्पित नहीं करनी चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव जी को केतकी और केवड़े का फूल अर्पित नहीं किया जाता।
विष्णु भगवान को जहां तुलसी दल अधिक प्रिय है, वहीं शिव जी तुलसीदल का पत्ता चढ़ाना किसी पाप से कम नहीं माना जाता।
कभी भी शिव जी को नारियल और नारियल पानी नही चढ़ाया जाता।
इस बात को लेकर बहुत कम लोग जानकारी रखते हैं कि शिव जी को हल्दी चढ़ाई भी शुभ नहीं होती।
इसके अलावा शिव शंकर को न ही इन्हें कुमकुम रोली, खंडित अक्षत, सिंदूर तथा तिल कभी नहीं चढ़ाने चाहिए।

न करें ये कार्य करें-
ज्योतिष मान्यताओं के अनुुसार शिव जी की पूजा के दौरान शंख वाद्य नहीं किया जाता।
कुछ लोग इस बात से अंजान है कि शिवलिंग की जलाधारी को लांघा नहीं जात, ऐसा करना शुभ नहीं होता। और न ही कभी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा की जाती है।
खासतौर पर श्रावण मास में शिव जी की आराधना में काले रंग के कपड़े पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए।