चंडीगढ़। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 का परिणाम आज घोषित किया गया है। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ का आल ओवर 38 रैंक रहा है, जो कि पिछले साल के मुकाबले 22 अंक पिछड़ा है। बीते साल की रैंकिंग की बात करें तो चंडीगढ़ 16 नंबर पर था। चंडीगढ़ ने इस बार कुल 4277.29 स्कोर किया है। वहीं, चंडीगढ़ के साथ सटे पड़ोसी शहर पंचकूला की भी रैंकिंग गिरी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के परिणाम में पंचकूला का रिजल्ट पिछले वर्ष से कुछ खराब रहा है। पंचकूला 99वें स्थान पर पहुंच गया है। केंद्रीय हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर्स की तरफ से 2020 में जारी रैंकिंग में पंचकूला 56वें स्थान पर पहुंच गया था।

चंडीगढ़ नगर निगम के सभी दावे फेल साबित हुए हैं। नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में अबकी बार सुधार के दावे कर रहा था। इस बार 80 फीसद सूखा और गीला कचरा का सेग्रीशन करने का दावा किया गया था, लेकिन सभी दावे गलत साबित हुए हैं। इस समय शहर में प्रतिदिन 500 टन कचरा निकलता है लेकिन गार्बेज प्लांट में प्रतिदिन 100 टन कचरा ही मुश्किल से प्रशस्त हो पाता है इसलिए लगातार डंपिंग ग्राउंड में कचरे का पहाड़ बढ़ता जा रहा है।

अब तक के सर्वेक्षण में चंडीगढ़ की स्थिति

  • साल 2016 में नंबर-2 पर
  • साल 2017 में 11 वां स्थान
  • साल 2018 में मिला तीसरा स्थान
  • साल 2019 मे मिला 20 वां स्थान
  • साल 2021 में मिला था 16 वां स्थान

कांग्रेस जोर शोर से उठाएगी मामला

वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण में चंडीगढ़ के खराब प्रदर्शन के लिए कांग्रेस ने नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया है।  कांग्रेस का कहना है कि इस मामले को जोरों शोरों से उठाया जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता सतिश कैंथ का कहना है कि भाजपा शासित नगर निगम शहर की सफाई व्यवस्था के लिए कुछ भी नहीं कर पाया है, जिसका खामियाजा शहर वासियों को भुगतना पड़ रहा है। हर साल 200 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है।

पंचकूला का पिछले साल था 71वां रैंक

स्वच्छ भारत मिशन में नगर निगम पंचकूला ने भी भाग लिया और दो वर्षों के दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में 434 शहरों में से पंचकूला 211वें स्थान पर था। 2018 में 4302 शहरों में से पंचकूला 142वें पर पहुंच गया था। नगर निगम पंचकूला ने वर्ष 2019 में शानदार उछाल मारकर 4267 शहरों में से 71वां रैंक हासिल किया और वर्ष 2020 में 56वां स्थान हासिल किया था। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस बार स्वच्छता रैंकिंग के लिए कुछ नियम कड़े कर दिए गए जिन पर खरा उतरने में पंचकूला असफल रहा और पंचकूला का रैंक 99 पर पहुंच गया। पंचकूला की असफलता का एक सबसे बड़ा कारण शहर में सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ना होना है, जिसके कारण बहुत नंबर पंचकूला के कट जाते हैं। पिछले कई वर्षों से सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का टेंडर लटका हुआ है और बार-बार इसकी तिथि बढ़ा दी जाती है, लेकिन अब तक टेंडर ना खुलने के कारण यह प्लांट नहीं लग पाया।