499 साल बाद चार ग्रहों की चाल होली पर्व के साथ देश में सुख-समृद्धि व शांति का संयाेग लेकर आ रही है. हिंदी पंचांग में 9 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा साेमवार के दिन होलिका दहन किया जाएगा. दूसरे दिन मंगलवार को होली खेली जाएगी. होली के दिन गुरु व शनि का विशेष याेग बन रहा है. यानी दाेनाें ग्रह अपनी-अपनी राशि में रहेंगे.

ज्योतिषचार्य के अनुसार होली के दिन गुरु व शनि का अपनी-अपनी राशि में आना घर-परिवार के साथ ही देश में सुखसमृद्धि व शांति स्थापित करने वाला संयाेग है. दूसरा बड़ा संयाेग सोमवार के दिन होलिका दहन होना है. इस दिन बृहस्पति व मंगल भी एक साथ रहेंगे. जाे बुद्धिजीवी वर्ग लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है. इस संयाेग में मांगलिक कार्य हाेंगे. वहीं सुखसमृद्धि व शांति के साथ विकास के रास्ते खुलेंगे. तीन मार्च से होलिका अष्टक शुरू होगा, जो नौ मार्च को होलिका दहन के बाद समाप्त होगा.

भद्रा के बजाय सर्वार्थ सिद्धि याेग में हाेली : हाेली के दिन ज्यादात्तर भद्रा रहती है. इस बार हाेलिका दहन सर्वार्थ सिद्धि याेग में किया जाएगा. पंचांग के अनुसार हाेलिका दहन के लिए गाेधूलि वेला का समय यानी शाम 6.32 से 6.50 बजे तक सर्वश्रेष्ठ माना गया है. बृहस्पति एवं मंगल की युति बुद्धिजीवी वर्ग के लिए शुभफलदायक मानी गई है. इससे पहले तीन मार्च से होलाष्टक का आगाज होगा. हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है. इस दाैरान सभी तरह के शुभ कर्म वर्जित रहते हैं. इन दिनों में पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है.

3 मार्च 1521 काे था ऐसा ही संयाेग, आज से होलाष्टक

गुरु व शनि एक साथ सूर्य नक्षत्र में आने से शुभफलदायक रहेंगे. होली के दिन 9 मार्च को गुरु अपनी धनु राशि में और शनि भी अपनी ही राशि मकर में रहेगा. इससे पहले इन दोनों ग्रहों का ऐसा योग 3 मार्च 1521 को बना था, तब भी ये दोनों ग्रह अपनी-अपनी राशि में ही थे. होली पर शुक्र मेष राशि में, मंगल और केतु धनु राशि में, राहु मिथुन में, सूर्य और बुध कुंभ राशि में, चंद्र सिंह में रहेगा. ग्रहों के इन योगों में होली आने से ये शुभ फल देने वाली रहेगी. यह योग देश में शांति स्थापित करवाने में सफल होगा.